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💥गर्मी के दोहे 💥

💥गर्मी के दोहे 💥 रहिमन कूलर राखिये ..बिन कूलर सब सून। कूलर बिना ना किसी को ..गर्मीमें मिले सुकून।। एसी जो देखन मैं गया ..एसी ना मिलया कोय। जब घर लौटा आपणे ..गर्मी में ऐसी-तैसी होय...

इंसान जाने कहां खो गये है...

एक अच्छी कविता प्राप्त हुई है, जो मनन योग्य है। "जाने क्यूं अब शर्म से, चेहरे गुलाब नही होते। जाने क्यूं अब मस्त मौला मिजाज नही होते। पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें। जाने ...

यदि कबीर जिन्दा होते तो आजकल के दोहे यह होता

यदि कबीर जिन्दा होते तो आजकल के दोहे यह होते :- पानी आँखों का मरा, मरी शर्म और लाज !       कहे बहू अब सास से, घर में मेरा राज !! भाई भी करता नहीं, भाई पर विश्वास !      बहन पराई हो गयी, साली खासमखास !! मंदिर में पूजा करें, घर में करें कलेश !       बापू तो बोझा लगे, पत्थर लगे गणेश !! बचे कहाँ अब शेष हैं, दया, धरम, ईमान !       पत्थर के भगवान हैं, पत्थर दिल इंसान !! पत्थर के भगवान को, लगते छप्पन भोग !      मर जाते फुटपाथ पर, भूखे, प्यासे लोग !! फैला है पाखंड का, अन्धकार सब ओर !     पापी करते जागरण, मचा-मचा   कर शोर !! पहन मुखौटा धरम का, करते दिन भर पाप!      भंडारे करते फिरें, घर में भूखा बाप !!

A new poem launched...and in Books from 2015....

A new poem launched...and in Books from 2015....  Johnny Johnny....Yes papa!!  Job in City....Yes papa!!  Lot of Tension....Yes papa!!  Too much Work....Yes papa!!  Family life....No papa!!  BP Sugar....High papa!!  Yearly Bonus....Joke papa!!  Annual Pay....Low papa!!  Personal Life....Lost papa!!  Promotion Incentive.... Ha!!Ha!!Ha!!